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Birth Certificate New Rules 2026: बच्चों के आधार कार्ड को लेकर UIDAI का बड़ा बदलाव

Birth Certificate New Rules 2026: बच्चों के आधार कार्ड से जुड़े नियमों में UIDAI ने एक अहम बदलाव किया है। अब कुछ विशेष परिस्थितियों में बच्चों का आधार कार्ड बनवाने के लिए Birth Certificate अनिवार्य नहीं रहेगा। यह फैसला उन माता–पिता के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्हें किसी वजह से अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में कठिनाई हो रही थी। डिजिटल इंडिया की सोच के अनुरूप यह कदम सरकारी सेवाओं को ज्यादा सरल, व्यावहारिक और आम लोगों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में उठाया गया है।

नए नियमों के तहत अब कुछ वैकल्पिक दस्तावेजों के आधार पर भी बच्चों का आधार कार्ड बनाया जा सकेगा। हालांकि सामान्य हालात में जन्म प्रमाण पत्र अब भी सबसे प्राथमिक और बेहतर दस्तावेज माना जाएगा, लेकिन इसकी सख्त अनिवार्यता को कुछ मामलों में ढील दी गई है। इस बदलाव से खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले परिवारों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

Birth Certificate New Rules 2026

UIDAI ने क्यों बदले आधार कार्ड से जुड़े नियम

UIDAI के इस फैसले के पीछे कई व्यावहारिक कारण सामने आए हैं। देश के अनेक हिस्सों में आज भी जन्म पंजीकरण समय पर नहीं हो पाता। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक प्रक्रियाएं धीमी होने की वजह से जन्म प्रमाण पत्र बनने में लंबा समय लग जाता है। कई बार बच्चों का जन्म अस्पताल के बजाय घर पर हो जाता है, जिससे तुरंत पंजीकरण संभव नहीं हो पाता।

इसके अलावा जागरूकता की कमी और पुराने, गैर-डिजिटल जन्म प्रमाण पत्रों के सत्यापन में आने वाली दिक्कतें भी बड़ी समस्या थीं। चूंकि आज शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और कई सरकारी योजनाओं में आधार कार्ड जरूरी हो गया है, इसलिए birth certificate की सख्ती के कारण कई बच्चे इन सुविधाओं से वंचित रह जाते थे। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए UIDAI ने नियमों को कुछ हद तक लचीला बनाया है।

किन परिस्थितियों में Birth Certificate जरूरी नहीं होगा

नए नियम सभी बच्चों पर एक समान लागू नहीं होते। केवल कुछ खास परिस्थितियों में ही birth certificate की अनिवार्यता से छूट दी गई है। इसमें वे बच्चे शामिल हैं जिनका जन्म घर पर हुआ हो और समय पर पंजीकरण नहीं हो सका हो, दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों के बच्चे, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, या फिर प्राकृतिक आपदा और आपात स्थिति के दौरान जन्मे बच्चे।

इसके अलावा अनाथ बच्चे, गोद लिए गए बच्चे या ऐसे मामले जहां माता–पिता की पहचान या मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, वहां भी वैकल्पिक प्रमाणों के आधार पर आधार कार्ड बनाया जा सकेगा। सामान्य परिस्थितियों में जन्म प्रमाण पत्र अब भी प्राथमिक दस्तावेज ही माना जाएगा।

Birth Certificate का नया डिजिटल सिस्टम

भारत सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से birth certificate के लिए घर बैठे आवेदन किया जा सकता है। अस्पताल या स्वास्थ्य कर्मी जन्म के तुरंत बाद जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर देते हैं और माता–पिता को मोबाइल व ईमेल के जरिए सूचना मिल जाती है।

पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है, जिसमें आवेदन, दस्तावेज अपलोड और सत्यापन शामिल है। आमतौर पर 7 से 15 दिनों के भीतर डिजिटल birth certificate जारी हो जाता है, जिसे डाउनलोड कर प्रिंट भी किया जा सकता है। पुराने कागजी प्रमाण पत्र को भी इसी पोर्टल पर अपडेट कराने की सुविधा दी गई है।

QR कोड वाले Birth Certificate का महत्व

नए डिजिटल birth certificate में QR कोड जोड़ा गया है, जिससे इसकी प्रामाणिकता तुरंत जांची जा सकती है। स्कूल में प्रवेश, आधार कार्ड, पासपोर्ट या किसी सरकारी योजना के दौरान QR कोड स्कैन करके प्रमाण पत्र का सत्यापन किया जा सकता है। इससे फर्जी दस्तावेजों की संभावना लगभग खत्म हो जाती है और पूरी प्रक्रिया ज्यादा भरोसेमंद बनती है।

पुराने बच्चों के लिए क्या है व्यवस्था

जिन बच्चों का जन्म डिजिटल सिस्टम लागू होने से पहले हुआ है, उनके पुराने birth certificate अभी भी मान्य रहेंगे। फिर भी यह सलाह दी जाती है कि सुविधा और सुरक्षा के लिए वे पुराने प्रमाण पत्र को अपडेट कर QR कोड वाला नया डिजिटल प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं। जिन बच्चों के पास कोई जन्म प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए देरी से पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है, जिसमें कुछ अतिरिक्त दस्तावेज या शपथ पत्र की जरूरत पड़ सकती है। राहत की बात यह है कि अब पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आसान कर दी गई है।

Birth Certificate के बिना आधार के लिए वैकल्पिक दस्तावेज

यदि birth certificate उपलब्ध नहीं है, तो आधार कार्ड बनवाने के लिए कुछ अन्य दस्तावेज भी स्वीकार किए जा सकते हैं। इनमें स्कूल रिकॉर्ड, टीकाकरण कार्ड, अस्पताल का डिस्चार्ज सारांश, पंचायत या नगर निकाय द्वारा जारी जन्म तिथि प्रमाण, माता–पिता का आधार कार्ड और शपथ पत्र शामिल हो सकते हैं। आधार केंद्र पर जाने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना बेहतर होता है कि स्थानीय स्तर पर कौन–कौन से वैकल्पिक दस्तावेज मान्य हैं।

पूरे देश में लागू होंगे नए नियम

यह व्यवस्था किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारत में चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है। कई राज्यों में पूरी तरह ऑनलाइन सिस्टम शुरू हो चुका है और बाकी राज्यों में इसे तेजी से लागू किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य सेवा केंद्र और ई–मित्र जैसी सुविधाओं के जरिए लोगों को सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

कुल मिलाकर, birth certificate और आधार कार्ड से जुड़े ये नए नियम आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं। इससे बच्चों को समय पर पहचान पत्र मिल सकेगा और वे शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के उठा सकेंगे।

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