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Old Pension Scheme Update: OPS पेंशन स्कीम 2026 फिर क्यों चर्चा में है गारंटीड पेंशन

Old Pension Scheme Update: ओल्ड पेंशन स्कीम यानी OPS वर्ष 2026 की शुरुआत में एक बार फिरज एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे के रूप में सामने आई है। करीब दो दशक पहले नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) लागू होने के बाद OPS को बंद कर दिया गया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के कारण इस विषय ने फिर से जोर पकड़ लिया है।

देशभर के लाखों सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी यह जानने को उत्सुक हैं कि क्या आने वाले समय में पेंशन व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

Old Pension Scheme Update

OPS से NPS और अब UPS तक का सफर

2004 से पहले केंद्र सरकार के सभी कर्मचारी ओल्ड पेंशन स्कीम के दायरे में आते थे। इस व्यवस्था के तहत रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को उसकी अंतिम सैलरी का लगभग 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता था, जिसमें समय-समय पर महंगाई भत्ता भी जुड़ता था। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि पेंशन पूरी तरह सरकार की जिम्मेदारी होती थी और कर्मचारी को भविष्य की आय को लेकर किसी तरह की अनिश्चितता नहीं रहती थी।

लेकिन वर्ष 2004 में नई भर्ती के लिए OPS को समाप्त कर नेशनल पेंशन सिस्टम लागू कर दिया गया। NPS एक अंशदायी और बाजार से जुड़ी योजना है, जिसमें कर्मचारी और सरकार दोनों नियमित रूप से योगदान करते हैं। रिटायरमेंट के समय मिलने वाली राशि निवेश के प्रदर्शन पर निर्भर करती है, जिससे कई कर्मचारियों को भविष्य की पेंशन को लेकर असुरक्षा महसूस होती है।

इसके बाद अप्रैल 2025 में सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का प्रस्ताव सामने रखा। यह योजना कुछ केंद्रीय कर्मचारियों को एक निश्चित ढांचे के तहत पेंशन सुरक्षा देने की बात करती है, हालांकि इसे पूरी तरह से OPS की वापसी नहीं माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से बढ़ी उम्मीदें

OPS 2026 से जुड़ा सबसे अहम पहलू सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई है। यह मामला इस बात से जुड़ा है कि क्या पुराने कर्मचारियों को दोबारा ओल्ड पेंशन स्कीम का लाभ मिल सकता है या फिर NPS/UPS में पेंशन सुरक्षा को और मजबूत किया जाना चाहिए।

हालांकि अभी तक कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आया है, लेकिन शीर्ष अदालत में इस मुद्दे पर चर्चा शुरू होना ही कर्मचारियों के लिए उम्मीद की बड़ी वजह बन गया है। देशभर के कर्मचारी संगठनों को इससे नया बल मिला है और वे गारंटीड पेंशन की मांग को और मजबूती से उठा रहे हैं।

OPS समर्थकों का तर्क है कि बाजार आधारित पेंशन व्यवस्था रिटायर कर्मचारियों को वह सुरक्षा नहीं देती, जिसकी उन्हें लंबे समय तक सेवा देने के बाद जरूरत होती है। खासकर महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में एक स्थिर और सुनिश्चित पेंशन बेहद जरूरी मानी जाती है, जो OPS की सबसे बड़ी ताकत थी।

Old Pension Scheme Update 2026 में क्या बदलाव संभव है

यदि सुप्रीम कोर्ट या सरकार OPS को आंशिक या पूर्ण रूप से लागू करने की दिशा में कदम उठाती है, या फिर NPS/UPS में पेंशन गारंटी को और मजबूत किया जाता है, तो इसका सीधा असर लाखों मौजूदा और भविष्य के पेंशनभोगियों पर पड़ेगा। इससे सरकारी कर्मचारियों में रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ सकता है।

हालांकि नीति निर्माताओं की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले सरकार को वित्तीय भार और दीर्घकालिक स्थिरता पर गंभीरता से विचार करना होगा। पेंशन सुधार का फैसला केवल कर्मचारियों के हित ही नहीं, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति से भी जुड़ा हुआ है।

फिलहाल क्या करें कर्मचारी

अभी तक OPS 2026 को लेकर कोई अंतिम और आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। इसलिए सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को सलाह दी जाती है कि वे आने वाले महीनों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और केंद्र सरकार की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखें।

संक्षेप में कहा जाए तो OPS एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुकी है। क्या 2026 में गारंटीड पेंशन की वापसी होगी या मौजूदा सिस्टम में सुधार किया जाएगा, इसका जवाब आने वाला समय ही देगा।

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