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Outsource Employee Big Update: कार्यरत सुरक्षाकर्मियों के पक्ष में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नियमितीकरण के आदेश

Outsource Employee Big Update: देशभर में आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सामने आया है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सरकारी संस्थानों में वर्षों से ठेके पर कार्यरत सुरक्षाकर्मियों के हित में अहम आदेश जारी करते हुए उनके नियमितीकरण पर जोर दिया है।

लंबे समय से अस्थायी स्थिति और कम वेतन जैसी समस्याओं से जूझ रहे कर्मचारियों के लिए यह निर्णय राहत भरी खबर माना जा रहा है। न्यायालय का यह आदेश न केवल कानूनी जीत है, बल्कि श्रमिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है।

Outsource Employee Big Update

मामले की पृष्ठभूमि: वर्षों पुराना संघर्ष

यह मामला पंजाब के उन सुरक्षाकर्मियों से जुड़ा है जो वर्ष 2008 से विभिन्न सरकारी संस्थानों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य कर रहे थे। लगातार कई वर्षों तक नियमित रूप से सेवा देने के बावजूद उन्हें अस्थायी कर्मचारी माना जाता रहा और स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिलीं। Outsource Employee ने प्रशासन से कई बार नियमितीकरण और समान वेतन की मांग की, लेकिन जब 2020 में उनकी मांगों को अस्वीकार कर दिया गया तो उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाओं में न्यूनतम मजदूरी, महंगाई भत्ता और सेवा सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए गए। अदालत ने पांच अलग-अलग याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई करते हुए मामले को गंभीरता से लिया।

Outsource Employee Big Update वेतन विसंगति पर अदालत की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य सामने आया कि विभाग द्वारा ठेकेदार को प्रति सुरक्षाकर्मी लगभग ₹14,000 प्रतिमाह दिए जा रहे थे, जबकि कर्मचारियों के खाते में केवल करीब ₹8,500 ही पहुंच रहे थे। शेष राशि एजेंसी द्वारा रोक ली जाती थी। अदालत ने इस व्यवस्था को श्रमिकों के शोषण का उदाहरण बताते हुए गंभीर चिंता जताई।

न्यायालय ने कहा कि जब कर्मचारी लंबे समय से नियमित प्रकृति का कार्य कर रहे हैं, तो उन्हें अस्थायी बताकर सुविधाओं से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है।

संवैधानिक अधिकारों पर अदालत की टिप्पणी

न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने आदेश में कहा कि सरकार एक आदर्श नियोक्ता होने के नाते कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए बाध्य है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समान कार्य करने वालों के बीच वेतन और सुविधाओं में भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 की भावना के विपरीत है।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बजट बचाने के नाम पर कर्मचारियों के अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता।

Outsource Employee Big Update छह सप्ताह में नियमितीकरण का निर्देश

इस फैसले में उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि छह सप्ताह के भीतर योग्य सुरक्षाकर्मियों की सेवाओं को नियमित किया जाए। यदि निर्धारित समय सीमा में आदेश लागू नहीं किया गया तो कर्मचारियों को स्वतः नियमित कर्मचारी माना जाएगा।

यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर सरकारी विभाग न्यायिक आदेशों के पालन में देरी करते हैं। इस बार अदालत ने स्पष्ट समयसीमा तय कर दी है।

देशभर के आउटसोर्स कर्मचारियों पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल पंजाब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य राज्यों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम कर रहे लाखों कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। सफाईकर्मी, सुरक्षा गार्ड, तकनीशियन और अन्य श्रेणियों के कर्मचारी लंबे समय से स्थायी नियुक्ति की मांग करते रहे हैं।

हालांकि हर मामला अलग परिस्थितियों पर आधारित होता है, लेकिन यह निर्णय भविष्य में कानूनी उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है।

भविष्य में क्या बदलाव संभव हैं

यदि आदेश का सही तरीके से पालन होता है, तो संबंधित सुरक्षाकर्मियों को नियमित वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन लाभ और चिकित्सा सुविधाएं मिलने का रास्ता साफ हो सकता है। साथ ही यह फैसला सरकारों के लिए भी संकेत है कि स्थायी प्रकृति के कार्यों के लिए स्थायी नियुक्तियां करना अधिक उचित है।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का यह फैसला आउटसोर्स कर्मचारियों के अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। वर्षों से अस्थायी स्थिति में काम कर रहे सुरक्षाकर्मियों को अब न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। यह निर्णय दर्शाता है कि कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से श्रमिक अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं और समानता के सिद्धांत को मजबूत बना सकते हैं।

Official Notice

अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।

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